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बिहार सरकार की बड़ी घोषणा: 25 लाख महिलाओं को मिलेगा “महिला रोजगार योजना” की किस्त
पटना – बिहार सरकार ने आज एक बड़ा वित्तीय हस्तांतरण किया है। “मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना” के तहत लगभग 25 लाख महिलाओं के बैंक खातों में प्रतियेक को ₹10,000 की सहायता राशि जमा की गई है।
क्या है यह योजना?
इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना, आर्थिक रूप से उन्हें सशक्त बनाना और सामाजिक सुरक्षा देना है।
योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से राशि भेजी जाती है, ताकि भ्रष्टाचार की संभावना न्यून हो।
इस किस्त को जारी करने में सरकार ने कुल ₹2,500 करोड़ का प्रावधान किया है (25 लाख × ₹10,000)।
किसने और कैसे किया हस्तांतरण?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस राशि को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में भेजने की प्रक्रिया की निगरानी की।
इस मौके पर जिले-स्तर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्वयं सहायता समूह (जीविका समूह) की महिलाओं ने इस कार्यक्रम में हिस्सेदारी की।
कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि करीब 21 लाख महिलाओं के खाते में राशि भेजी गई है — यह आंकड़ा संभवतः आज की किस्त का पहला चरण हो सकता है।
किसी का खाता अभी भी खाली? — क्या करें
कुछ महिलाओं ने शिकायत की है कि उनकी राशि अभी तक उनके खाते में नहीं पहुंची है।
ऐसी स्थिति में उन्हें निम्नलिखित कदम उठाने की सलाह दी जा सकती है:
1. बैंक खाते की जानकारी जाँचना — खाता संख्या, IFSC, नाम, आधार लिंक आदि त्रुटि न हो।
2. संबंधित बैंक शाखा से संपर्क करें और पूछताछ करें कि राशि क्यों नहीं आई।
3. स्थानीय प्रखंड कार्यालय या योजना कार्यालय में जाकर शिकायत दर्ज कराएं।
4. सरकारी हेल्पलाइन या पोर्टल के माध्यम से शिकायत की स्थिति ट्रैक करें।
समीक्षा और चुनौतियाँ
इस कदम को एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है, क्योंकि ऐसे बड़े पैमाने पर महिलाओं तक आर्थिक सहायता पहुँचाने की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हो रही है।
हालांकि, यह देखा जाना बाकी है कि यह राशि महिलाओं को स्थायी स्वरोजगार स्थापित करने में किस हद तक मदद करती है, या केवल तात्कालिक राहत बनी रहेगी।
इसके अलावा, जिन महिलाओं के खाते में अब तक राशि नहीं आई है, वे तकनीकी बाधाओं या पंजीकरण में त्रुटियों के कारण वंचित हो सकती हैं — इसे ठीक करने के लिए सरकारी तंत्र को अधिक जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई करनी होगी।
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तेज प्रताप यादव को मिली Y+ सुरक्षा, निशिकांत दुबे बोले—‘सुरक्षा पर राजनीति नहीं होनी चाहिए’
पटना, 9 नवंबर 2025: राजद नेता तेज प्रताप यादव को केंद्र सरकार द्वारा Y+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान किए जाने के बाद बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है—क्या तेज प्रताप भाजपा के संपर्क में हैं? क्या वे पार्टी बदलने की तैयारी में हैं?
इन्हीं अटकलों के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बयान जारी करते हुए कहा कि सुरक्षा का मुद्दा राजनीति से ऊपर होता है और इस पर सियासत नहीं की जानी चाहिए।
“सुरक्षा तभी दी जाती है जब असल खतरा हो”
निशिकांत दुबे ने कहा,
> “केंद्र सरकार तभी सुरक्षा प्रदान करती है जब किसी व्यक्ति की सुरक्षा को असल में खतरा होता है। मुझे लगता है कि तेज प्रताप यादव को सुरक्षा की जरूरत थी, इसलिए Y+ सिक्योरिटी दी गई है।”
उन्होंने आगे कहा कि,
> “तेज प्रताप चुनाव जीतेंगे या नहीं, यह भविष्य बताएगा, लेकिन खतरा उनकी ही पार्टी से हो सकता है।”
तेजस्वी यादव की सीट पर भी टिप्पणी
निशिकांत दुबे ने दावा किया कि राघोपुर सीट से तेजस्वी यादव हार रहे हैं।
उनके अनुसार, इससे राजद कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष बढ़ा है और कुछ तेज प्रताप यादव से नाराज हो सकते हैं, इसी वजह से उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ा है।
विपक्ष का आरोप – भाजपा की रणनीति
निशिकांत दुबे के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति गरम हो गई है।
विपक्षी दलों ने इसे भाजपा की रणनीति बताया है, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह सुरक्षा से जुड़ा प्रशासनिक मामला है, राजनीति से इसका कोई संबंध नहीं।
सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
तेज प्रताप यादव को Y+ सुरक्षा मिलने के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है।
कुछ लोग इसे भाजपा से नजदीकी का संकेत मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि यह सिर्फ सुरक्षा का मामला है।
अब सबकी नजर तेज प्रताप पर
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम के बाद तेज प्रताप यादव के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं।
क्या वे इस पर कोई राजनीतिक बयान देंगे या इसे केवल सुरक्षा मुद्दा मानकर चुप रहेंगे — यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
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राजद नेता मृत्युंजय तिवारी का दावा – 14 नवंबर को बिहार में होगा बदलाव, बनेगी महागठबंधन की सरकार
पटना, 9 नवंबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से पहले राजद नेता मृत्युंजय तिवारी ने बड़ा राजनीतिक दावा किया है। उन्होंने कहा कि 14 नवंबर को बिहार में बदलाव निश्चित है और महागठबंधन की सरकार बनने जा रही है।
तिवारी ने कहा कि “बिहार की जनता अब ऐसी सरकार को देखना चाहती है, जिसे उन्होंने वोट दिया है। महागठबंधन की सरकार आने के बाद किए गए सभी वादों को पूरा किया जाएगा, क्योंकि जनता ने बिहार के नौजवानों के भविष्य को बचाने के लिए मतदान किया है।”
‘14 नवंबर को बंपर जीत तय’
राजद नेता ने आगे कहा कि 11 नवंबर को दूसरे चरण का मतदान संपन्न होने के बाद लोकतंत्र का महापर्व पूरा हो जाएगा, और 14 नवंबर को महागठबंधन की बंपर जीत देखने को मिलेगी।
उन्होंने विधानसभा के शीतकालीन सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष पूरी तैयारी के साथ सत्र में हिस्सा लेगा, और सरकार को हर मुद्दे पर जवाब देना होगा।
धर्म और भाईचारे पर बयान
मृत्युंजय तिवारी ने सामाजिक सद्भावना पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा,
“सब जानते हैं कि कौन हिंदू है, कौन मुस्लिम, कौन सिख और कौन ईसाई — यही हमारे देश की खूबसूरती है। हम एक-दूसरे के धर्मों का सम्मान करते हैं, गले मिलते हैं, भाईचारा बढ़ाते हैं, और यही भारत को दुनिया का सबसे अच्छा देश बनाता है।”
चुनावी पृष्ठभूमि
बिहार में रविवार शाम चुनाव प्रचार थम जाएगा, जिसके बाद 11 नवंबर को दूसरे चरण के लिए मतदान होना है।
पहले चरण में 6 नवंबर को बंपर वोटिंग हुई थी, और अब दूसरे चरण में भी भारी मतदान की उम्मीद जताई जा रही है।
राज्य में 14 नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे, जिसके बाद यह तय होगा कि सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाती है।
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बिहार चुनाव 2025: भागलपुर में महागठबंधन में दरार! राहुल और तेजस्वी आमने-सामने
भागलपुर: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग से पहले महागठबंधन की एकता खुलकर टूटती दिख रही है। भागलपुर जिले की दो सीटों पर कांग्रेस और आरजेडी अब एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर चुकी हैं।
कभी साझा मंच और गठबंधन की मजबूती का दावा करने वाले राहुल गांधी और तेजस्वी यादव अब अपने-अपने दलों के प्रत्याशियों के लिए वोट मांगते नजर आ रहे हैं।
कहलगांव सीट पर आरजेडी ने रजनीश यादव को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने प्रवीण सिंह कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। यही नहीं, एक अन्य सीट पर राहुल गांधी ललन यादव के लिए प्रचार कर रहे हैं, तो तेजस्वी यादव चंदन सिन्हा को जिताने की अपील कर रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बन गई है। कोई नहीं जानता कि अब किसके झंडे तले प्रचार किया जाए। दोनों नेता एक ही इलाके में अलग-अलग मंच से रैली कर रहे हैं, जिससे महागठबंधन की एकता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह टकराव न केवल गठबंधन की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि वोट बैंक में भी सीधा असर डाल सकता है।
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