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जुर्म

झारखंड के पलामू में जेएमएम प्रखंड अध्यक्ष मुन्ना सिन्हा की धारदार हथियार से हत्या

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पलामू : पलामू जिले से बड़ी खबर सामने आई है। यहां झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के पांकी प्रखंड अध्यक्ष मुन्ना सिन्हा की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। यह वारदात दंदर कला गांव में हुई, जब मुन्ना सिन्हा अपने खेत में ट्रैक्टर से जुताई कर रहे थे।

विवाद की वजह

जानकारी के मुताबिक, यह हत्या भूमि विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। मुन्ना सिन्हा का गांव के ही कुछ लोगों — अरुण ठाकुर, डोमन ठाकुर और अन्य परिजनों — से जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी को लेकर मंगलवार को दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई और इसी दौरान धारदार हथियार से उन पर हमला कर दिया गया।

मौके पर ही मौत

हमले में मुन्ना सिन्हा को सिर और गर्दन पर गंभीर चोटें आईं। उन्हें तुरंत मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एमएमसीएच), डालटनगंज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही पांकी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया और आरोपियों की तलाश में छापेमारी अभियान शुरू कर दिया है।

राजनीतिक साजिश की आशंका

हालांकि शुरुआती जांच में मामला भूमि विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन स्थानीय नेताओं ने इसे राजनीतिक साजिश से भी जोड़कर देखा है। जेएमएम नेताओं ने मांग की है कि पुलिस मामले की उच्चस्तरीय जांच करे और दोषियों को जल्द गिरफ्तार करे।

मृतक की पहचान

मुन्ना सिन्हा की उम्र लगभग 38 वर्ष बताई जा रही है। वह इलाके में एक सक्रिय जेएमएम नेता के रूप में जाने जाते थे और स्थानीय राजनीति में उनका प्रभाव था।

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तेज रफ्तार ट्रेलर ने ली युवक की जान, गिरिडीह में रातभर सड़क जाम

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गिरिडीह: 17 नवंबर की देर रात नेताजी चौक के पास एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में बाइक सवार युवक रोहित कुमार राठौर की मौत हो गई। तेज रफ्तार ट्रेलर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे रोहित एक खड़े ट्रक के नीचे जा दबे और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। हादसे के बाद ट्रेलर व उसका चालक मौके से फरार हो गए, जबकि लोगों ने ट्रक को घेर लिया।

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने शव को सड़क पर रखकर रात में ही सड़क जाम कर दिया, जिसके कारण वाहनों की लंबी कतार लग गई। सूचना मिलने पर SDPO जीतवाहन उरांव, DSP कौशर अली और नगर थाना प्रभारी ज्ञान रंजन कुमार मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया।

बताया जाता है कि रोहित, कोडरमा सांसद प्रतिनिधि दिनेश प्रसाद यादव के साथ काम करते थे। शाम में वे उन्हें देवघर एयरपोर्ट छोड़कर लौटे थे और मैच देखकर घर जा रहे थे, तभी यह दुर्घटना हो गई।

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झारखंड के पूर्व DGP अनुराग गुप्ता के बहाने बाबूलाल मरांडी के निशाने पर कौन?

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रांची: झारखंड में पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल, नियुक्ति और उन पर लगे गंभीर आरोपों को लेकर सियासत फिर से गर्म हो गई है। झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार से कई सवाल पूछते हुए कहा कि अनुराग गुप्ता की नियुक्ति से लेकर निलंबन, सेवा विस्तार और इस्तीफे तक पूरी प्रक्रिया संदिग्ध रही है, और सरकार ने आज तक इन मामलों की स्वतंत्र जांच नहीं कराई।

मरांडी ने आरोप लगाया कि पूर्व डीजीपी पर वसूली, अवैध उत्खनन, खनन माफिया से सांठगांठ, तस्करी और रंगदारी जैसे गंभीर आरोप हैं, लेकिन सरकार ने इन शिकायतों को दरकिनार किया। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार “सुरक्षा” देती रही और बड़े घोटालों में हुई जांचों को प्रभावित किया गया।

रिटायर्ड आईपीएस बनाम बाबूलाल मरांडी: आरोपों की नई जंग

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्होंने पहले ही मुख्यमंत्री को शराब घोटाले को लेकर लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में CBI जांच में वरिष्ठ IAS अधिकारी विनय चौबे गिरफ्तार हुए, लेकिन अनुराग गुप्ता के ACB प्रमुख रहते
90 दिनों तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई, जिससे आरोपी को जमानत मिल गई।

इसी तरह, कफ सिरप तस्करी के मामले में जब गुजरात ATS ने कार्रवाई की, तो राज्य सरकार और अनुराग गुप्ता द्वारा सीआईडी जांच के नाम पर हस्तक्षेप किए जाने का आरोप भी उन्होंने लगाया।

अनुराग गुप्ता के बहाने मरांडी के निशाने पर कौन?

राजनीतिक हलकों में यह सवाल चर्चा में है कि बाबूलाल मरांडी बार-बार अनुराग गुप्ता को क्यों निशाना बना रहे हैं। क्या यह हमला वास्तव में अनुराग गुप्ता पर है, या फिर उनके बहाने झारखंड सरकार—खासतौर पर हेमंत सोरेन—पर सीधा प्रहार?

मरांडी का आरोप है कि—

1. पूर्व DGP और गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का गठजोड़

उन्होंने दावा किया कि अनुराग गुप्ता का कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा से सीधा संपर्क था।

अवैध वसूली को आसान बनाने के लिए “कोयलांचल शांति समिति” नाम का एक संगठन भी बनाया गया था।

अवैध खनन और शराब माफिया से होने वाली कमाई का 40% हिस्सा अनुराग गुप्ता तक पहुंचता था, ऐसा दावा उन्होंने किया।

2. अवैध नियुक्ति का आरोप

मरांडी ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार ने नियमों को दरकिनार कर ‘गिव-एंड-टेक’ आधार पर अनुराग गुप्ता को DGP बनाया।

केंद्र सरकार द्वारा सेवा विस्तार अस्वीकार करने के बावजूद उन्हें पद पर बनाए रखना असंवैधानिक था।

3. राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आरोप

मरांडी ने यह भी दावा किया कि—

सुजीत सिन्हा गिरोह पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार मंगाने की कोशिश कर रहा था।

इस मामले में अनुराग गुप्ता की भूमिका की जाँच NIA से कराई जानी चाहिए।

 

राजनीतिक संदेश क्या है?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बाबूलाल मरांडी लगातार इस मुद्दे को उठाकर

एक ओर पूर्व DGP के कार्यकाल में हुई कार्रवाइयों पर सवाल खड़ा कर रहे हैं,

दूसरी ओर हेमंत सोरेन सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

अनुराग गुप्ता के बहाने बाबूलाल मरांडी का असली निशाना वर्तमान सरकार और उसकी कार्यशैली बताई जा रही है।

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धनबाद पुलिस ने पकड़ी प्रिंस खान गैंग की स्लीपर सेल — चार गिरफ्तार, बड़ी मात्रा में नकदी और हथियार बरामद

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धनबाद, 5 नवंबर 2025 — जिले की पुलिस ने प्रिंस खान गिरोह की स्लीपर सेल पर मारक कार्रवाई करते हुए चार शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से भारी मात्रा में नकदी, हथियार और जमीन से संबंधित दस्तावेज बरामद किए हैं।

मामले की मुख्य बातें

गिरफ्तार अपराधियों के पास से ₹17,34,900 नकद, एक पिस्टल, 47 जिंदा कारतूस, 18 मोबाइल फोन, 9 पासबुक, 9 चेकबुक, 18 एटीएम/डेबिट कार्ड तथा लगभग 70 जमीन से जुड़े डीड व एग्रीमेंट पेपर मिले।

गिरफ्तार अपराधियों में शामिल हैं:

परवेज खान (नया बाजार, कबाड़ी पट्टी)

सैफ आलम उर्फ राशिद (कमरमखदूमी रोड, वासेपुर)

तौशिफ आलम उर्फ मुसा (मंदिर ग्राउंड, नवीनगर वासेपुर)

इम्तियाज अली उर्फ लाडले (शमशेर नगर, भूली)

कार्रवाई में लगभग 60 पुलिसकर्मियों की टीम लगी थी, जिसमें छह डीएसपी, सात इंस्पेक्टर और 36 एएसआई शामिल थे।

गिरोह की कार्य-प्रणाली

पुलिस पूछताछ में पता चला है कि ये चार आरोपी प्रिंस खान गिरोह के सहयोगी के रूप में काम करते थे। उनके मुख्य दायित्व थे: गिरोह के सदस्यों को ठिकाना देना, उनके आने-जाने की व्यवस्था करना तथा व्यापारियों की जानकारी गिरोह तक पहुँचाना।
रंगदारी की वसूली हवाला व क्रिप्टो करेंसी (यूएसडीटी) के माध्यम से गिरोह के सरगना प्रिंस खान तक भेजी जाती थी। इस राशि को बाद में बरवाअड्डा, गोविंदपुर और आठ लेन क्षेत्र में जमीन में निवेश कर वैध दिखाया जाता था।

अन्य अहम जानकारी

पुलिस ने प्रिंस खान को आर्थिक मदद करने वालों की लगभग 100 लोगों की सूची तैयार की है, जिनका सत्यापन किया जा रहा है।

पकड़ी गई पिस्टल एक लाइसेंसी हथियार है, जिसका लाइसेंस अब निष्क्रिय हो चुका था। इसे परवेज खान के कबाड़ीपट्टी स्थित ठिकाने से जब्त किया गया।

नकदी का वैध स्रोत सामने नहीं आ पाया है, इसलिए पुलिस ने आयकर विभाग को पत्र भेजकर जांच शुरू कर दी है। बैंकमोड़ थाना में मामला दर्ज किया गया है।

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