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बिहार चुनाव से पहले महागठबंधन में ‘महाकलह’, 11 सीटों पर उम्मीदवार आमने-सामने, तेजस्वी पर उल्टा पड़ सकता है खेल

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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की अंदरूनी कलह अब किसी से छिपी नहीं है। नामांकन वापसी की अंतिम तारीख नजदीक आने के बावजूद, आरजेडी, कांग्रेस, वाम दलों और वीआईपी के बीच सीट बंटवारे पर अब तक सहमति नहीं बन सकी है।
स्थिति यह है कि राज्य की कम से कम 11 विधानसभा सीटों पर महागठबंधन के सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर चुके हैं।

सियासी गलियारों में माना जा रहा है कि इस असहज स्थिति की जड़ में कांग्रेस के दो नेताओं — कन्हैया कुमार और पप्पू यादव — की भूमिका अहम है। दोनों नेताओं के राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान से अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन हाल के महीनों में उनके साथ हुए व्यवहार ने समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।

पप्पू यादव तो खुलेआम आरजेडी पर निशाना साध रहे हैं, जबकि कन्हैया कुमार भी तेजस्वी यादव की रणनीति से खासे नाराज़ बताए जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि जिस तरह लोकसभा चुनाव में तेजस्वी ने पूर्णिया में पप्पू यादव और बेगूसराय में कन्हैया कुमार को “दरकिनार” किया था, वैसा ही खेल अब तेजस्वी के साथ हो सकता है।


🔹 लोकसभा चुनाव से अब तक की पृष्ठभूमि

बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बेगूसराय सीट कन्हैया कुमार को देने की मांग की थी, लेकिन आरजेडी ने यह सीट सीपीआई को सौंप दी। इसी तरह पूर्णिया में पप्पू यादव भी कांग्रेस टिकट पर उतरना चाहते थे, मगर तेजस्वी ने सीट जेडीयू से आई बीमा भारती को दे दी।
हालांकि, इसके बावजूद पप्पू यादव ने यह सीट जीत ली, जिससे वे कांग्रेस के और करीब आ गए।

अब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ज्यादा सीटों की मांग करके तेजस्वी यादव का पूरा समीकरण बिगाड़ रही है। सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी द्वारा लगातार इन नेताओं को हल्के में लेने का नतीजा अब महागठबंधन की अंदरूनी टूट के रूप में दिख रहा है।


🔹 11 सीटों पर ‘महाकलह’ का गणित

नामांकन वापसी की अंतिम तारीख 23 अक्टूबर से पहले भी गठबंधन के भीतर गहरा मतभेद कायम है।
जानकारी के अनुसार —

  • 5 सीटों पर आरजेडी बनाम कांग्रेस की सीधी टक्कर है (वैशाली, सिकंदरा, कहलगांव, सुल्तानगंज और एक अन्य)।

  • 4 सीटों पर कांग्रेस और सीपीआई उम्मीदवार आमने-सामने हैं, जो वामपंथी-कांग्रेस तालमेल की कमी को दर्शाता है।

  • 2 सीटों पर वीआईपी और आरजेडी के प्रत्याशी भी भिड़े हुए हैं।

हालांकि, थोड़ी राहत के संकेत भी हैं। लालगंज सीट से कांग्रेस प्रत्याशी आदित्य कुमार राजा ने नामांकन वापस ले लिया, जिससे आरजेडी को वहां सीधी लड़ाई का मौका मिला है।
फिर भी, करीब 9 से 11 सीटों पर स्थिति अब भी उलझी हुई है।

कहा जा रहा है कि कई उम्मीदवारों को पीछे हटाने के लिए ऊपर से दबाव बनाया जा रहा है। खासतौर पर जहां पप्पू यादव और कन्हैया कुमार का प्रभाव है, वहां कांग्रेस ने जानबूझकर कड़ा रुख अपनाया है ताकि आरजेडी पर दबाव बने और कांग्रेस की राजनीतिक पकड़ मजबूत हो।


🔹 महागठबंधन के लिए बड़ा झटका

इस टकराव का सबसे बड़ा असर उन सीटों पर होगा, जहां सहयोगी दल आमने-सामने हैं।
कांग्रेस और आरजेडी की सीधी भिड़ंत से वोटों का बंटवारा तय है, और इसका सीधा फायदा एनडीए के उम्मीदवारों को मिल सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ सीट बंटवारे का नहीं, बल्कि महागठबंधन की एकजुटता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
अगर चुनाव से पहले यह बिखराव नहीं थमता, तो तेजस्वी यादव का “युवा नेता” और “बदलाव” वाला नैरेटिव कमजोर पड़ सकता है।

क्योंकि मतदाता हमेशा एक स्थिर और एकजुट विकल्प की तलाश में रहते हैं — और इस वक्त, महागठबंधन वैसा चेहरा पेश करने में नाकाम दिख रहा है।
पप्पू यादव और कन्हैया कुमार जैसे नेताओं को दरकिनार करना अब तेजस्वी यादव के लिए चुनावी सिरदर्द बनता जा रहा है।

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जीएम के बेटे की शादी पर रेल के करोड़ों खर्च? रेस्ट हाउस रेनोवेशन पर उठे गंभीर सवाल

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पूर्व मध्य रेल (ECR) के महाप्रबंधक @GM_ECRly के बेटे की शादी के आयोजन को लेकर रेस्ट हाउस के कथित रेनोवेशन पर करोड़ों रुपये खर्च होने के आरोप सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, जीएम के आधिकारिक बंगले को अस्थायी रूप से “रेस्ट हाउस” में परिवर्तित कर दिया गया और शादी से पहले बड़े पैमाने पर मरम्मत, सौंदर्यीकरण व इंटीरियर कार्य कराए गए।

सूत्रों का दावा है कि इन सभी कार्यों पर रेलवे के फंड से भारी राशि खर्च की गई, जबकि इन कार्यों की न तो तत्काल आवश्यकता थी और न ही इनके लिए निर्धारित किसी स्वीकृत मद का स्पष्ट उल्लेख उपलब्ध है।

रेलकर्मियों और जानकारों के अनुसार, इस तरह के निजी आयोजन के लिए सरकारी धन के उपयोग का औचित्य संदिग्ध है और यह रेलवे में वित्तीय अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जाँच एजेंसियों की चुप्पी भी बनी सवाल

रेलवे के अंदरूनी हलकों में पूछा जा रहा है कि—

यह खर्च किस फंड से किया गया?

क्या इसके लिए कोई आधिकारिक अनुमोदन लिया गया?

रेस्ट हाउस के नाम पर किए गए कार्यों का औचित्य क्या था?

वहीं कर्मचारियों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए खर्च के बावजूद जाँच एजेंसियाँ अब तक मौन हैं, जिससे आरोप और गहराते जा रहे हैं।

वित्तीय अनुशासन पर बड़ा प्रश्न

रेलवे में पहले से ही व्यय नियंत्रण और फिजूलखर्ची पर सख्त दिशानिर्देश लागू हैं, ऐसे में एक निजी विवाह समारोह के लिए सरकारी संपत्ति के उपयोग और करोड़ों की लागत वाले रेनोवेशन को लेकर पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की माँग ज़ोर पकड़ रही है।

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शादी समारोह से अगवा युवक 24 घंटे में बरामद, बिहार के 4 अपहरणकर्ता गिरफ्तार—एसएसपी की त्वरित कार्रवाई से हाई-प्रोफाइल केस सुलझा

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रांची जिले में एक हाई-प्रोफाइल अपहरण मामला महज 24 घंटे में सुलझा लिया गया। एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अपहृत युवक को सकुशल बचा लिया और चार अपहरणकर्ताओं को बिहार के गया जिले के डोभी से गिरफ्तार कर लिया।

शादी समारोह से युवक का अपहरण

23 नवंबर की देर रात दलादली ओपी क्षेत्र स्थित द पैलेस बैंक्वेट हॉल में अपनी बहन की शादी में शामिल हुए सुमित सोनी को चार अपराधियों ने अगवा कर लिया।

24 नवंबर को पीड़ित के पिता शिवशंकर प्रसाद (निवासी — आरा, बिहार) ने नगर थाना में पहुंचकर मामले की सूचना दी। उन्होंने बताया कि रात करीब 2 बजे बेटे सुमित ने फोन कर बताया कि चार अपराधियों ने उसका अपहरण कर लिया है और फिरौती मांगी जा रही है।

20 लाख रुपये की फिरौती की मांग

अपराधियों ने युवक की रिहाई के बदले 20 लाख रुपये की मांग की थी। धमकी दी गई थी कि रकम न देने पर सुमित को मारकर फेंक दिया जाएगा।

एसएसपी के निर्देश पर विशेष टीम गठित

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया।
ग्रामीण एसपी के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनी जिसने—

तकनीकी विश्लेषण

लोकेशन ट्रैकिंग

गोपनीय सूचना
के आधार पर सटीक कार्रवाई की।

टीम ने बिहार के डोभी (गया) में छापेमारी कर युवक सुमित सोनी को सकुशल बरामद किया और चारों अपराधियों को पकड़ा।

गिरफ्तार अपराधियों में शामिल हैं:

नारायण कुमार

सोनू कुमार विश्वकर्मा

सुमित कुमार

हर्ष कुमार

पूछताछ में खुलासा हुआ कि—

सभी अपराधी आरा, बिहार से सफेद वाहन में रांची पहुंचे थे

अपहरण पूरी तरह फिरौती के लिए रचा गया प्लान था

आरोपियों ने सुमित को पहले कुछ पैसे कर्ज के रूप में दिए थे और उसी रकम की वसूली के लिए अपहरण किया

 

पुलिस ने बताया— यह था एक सोचा-समझा षडयंत्र

जांच में पता चला कि कर्ज को लेकर विवाद के चलते चारों अपराधियों ने सुमित को अगवा करने की योजना बनाई थी। पुलिस सभी आरोपियों को रांची ले आई है और आगे की कार्रवाई जारी है।

चौंकाने वाली इस घटना में पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने अपहृत युवक की जान बचाई और आरोपियों को पकड़ा। मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा।

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श्रेयसी सिंह ने संभाला खेल मंत्री का पद, पीएम और सीएम को जताया धन्यवाद—बिहार में खेल विकास को लेकर किया बड़ा बयान

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पटना: बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन के बाद रविवार, 25 नवंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में पहली कैबिनेट बैठक आयोजित हुई। इसके साथ ही नए मंत्रियों ने विभागीय कार्यभार संभालना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने विकास भवन स्थित अपने कक्ष में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया।

पदभार ग्रहण के दौरान उन्होंने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और मीडिया प्रतिनिधियों से मुलाकात की और विभाग की मौजूदा योजनाओं तथा कार्यों की जानकारी ली।

पीएम मोदी और सीएम नीतीश को व्यक्त किया आभार

पदभार संभालने के बाद श्रेयसी सिंह ने जमुई की जनता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि खेल जगत में मिली मान और समर्थन ने उन्हें हमेशा प्रेरित किया है।
कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता और अंतरराष्ट्रीय शूटिंग खिलाड़ी रही श्रेयसी सिंह ने कहा कि खेलों से मिले अनुभव को वे अब बिहार के खेल विकास में उपयोग करेंगी।

“मैं खुद खेल पृष्ठभूमि से आती हूं” — श्रेयसी सिंह

मंत्री ने बताया कि वे स्वयं खेल पृष्ठभूमि से हैं और इसलिए:

खेल विभाग की सभी योजनाओं की जल्द समीक्षा करेंगी

खिलाड़ियों की जरूरतों को बेहतर समझते हुए बदलावों को गति देंगी

खेल अवसंरचना को और मजबूत बनाने पर जोर देंगी

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में बिहार ने खेल अवसंरचना के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है—
विशेषकर प्रत्येक ग्राम पंचायत में खेल मैदान, अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी जैसे कदमों ने राज्य की छवि बदली है।

“बिहार खेल प्रतिभाओं का अग्रणी केंद्र बनेगा” — मंत्री श्रेयसी सिंह

श्रेयसी सिंह ने राजगीर इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, राजगीर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, जिला स्तरीय खेल भवन, और अन्य 14 प्रमुख खेल अवसंरचना परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि नीतीश सरकार के बड़े निवेशों ने बिहार के स्पोर्ट्स इकोसिस्टम को नई मजबूती दी है।

उन्होंने आश्वासन दिया कि—

खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी

प्रशिक्षण, खेल विज्ञान और इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाया जाएगा

बिहार को देश के अग्रणी खेल राज्यों में बदलने के लिए पूरी निष्ठा से काम किया जाएगा

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