कोलकाता
विश्वकप विजेता ऋचा घोष को बंगाल सरकार का तोहफा, पुलिस विभाग में नौकरी का प्रस्ताव
सिलीगुड़ी। विश्वकप विजेता भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार खिलाड़ी ऋचा घोष को बंगाल सरकार ने बड़ा सम्मान दिया है। राज्य सरकार ने ऋचा को पुलिस विभाग में नौकरी का प्रस्ताव दिया है। यह जानकारी खुद ऋचा के पिता मानवेंद्र घोष ने साझा की।
उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से प्रस्ताव मिला है, हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि ऋचा को कौन-सा पद दिया जाएगा। इस पर ऋचा विचार कर जल्द ही अपना निर्णय लेंगी।
मानवेंद्र घोष ने कहा कि ऋचा का बचपन से ही सेना और पुलिस सेवा की ओर विशेष लगाव रहा है। शुक्रवार को अपने गृहनगर सिलीगुड़ी लौटने के बाद उनका जोरदार स्वागत हुआ।
इधर, बंगाल क्रिकेट संघ (CAB) की ओर से भी ऋचा को ईडन गार्डेंस स्टेडियम में विशेष सम्मान दिया जाएगा। शनिवार को आयोजित समारोह में उन्हें सोने के बल्ले और गेंद से सम्मानित किया जाएगा, जिस पर सौरव गांगुली और झूलन गोस्वामी के हस्ताक्षर होंगे।
यह सम्मान ऋचा घोष की उत्कृष्ट खेल प्रतिभा और देश के लिए उनके योगदान को सलाम करने के रूप में देखा जा रहा है।
कोलकाता
SIR पर चुनाव आयोग के एक्शन से पहले ममता बनर्जी ने कर दिया बड़ा खेला, पूरे बंगाल में मचा दी उथल-पुथल
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को बड़ा भूचाल देखने को मिला। चुनाव आयोग जहां आज देशभर में वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर बड़ा ऐलान करने वाला है, वहीं उससे ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रशासनिक मोर्चे पर बड़ा खेल कर दिया है।
सरकार ने अचानक आदेश जारी करते हुए राज्य के कई जिलों के जिलाधिकारियों (DM) का तबादला कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, जिन जिलों में डीएम बदले गए हैं, उनमें उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, कूचबिहार, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, दार्जीलिंग, मालदा, बीरभूम, झारग्राम और पूर्व मेदिनीपुर शामिल हैं।
इस फेरबदल के तहत कई अधिकारियों को जिला मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी से हटाया गया, जबकि कुछ को नए जिलों में तैनाती दी गई है। माना जा रहा है कि यह कदम चुनाव आयोग के SIR ऐलान से पहले राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति के तहत उठाया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी सरकार का यह फैसला आने वाले चुनावों की तैयारियों से जुड़ा हो सकता है। चूंकि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का काम होता है, ऐसे में डीएम बदलाव से प्रशासनिक नियंत्रण पर असर पड़ सकता है।
वहीं, विपक्ष ने इसे “चुनावी हेरफेर की साजिश” बताते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है।
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