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झारखंड के पूर्व DGP अनुराग गुप्ता के बहाने बाबूलाल मरांडी के निशाने पर कौन?

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रांची: झारखंड में पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल, नियुक्ति और उन पर लगे गंभीर आरोपों को लेकर सियासत फिर से गर्म हो गई है। झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार से कई सवाल पूछते हुए कहा कि अनुराग गुप्ता की नियुक्ति से लेकर निलंबन, सेवा विस्तार और इस्तीफे तक पूरी प्रक्रिया संदिग्ध रही है, और सरकार ने आज तक इन मामलों की स्वतंत्र जांच नहीं कराई।

मरांडी ने आरोप लगाया कि पूर्व डीजीपी पर वसूली, अवैध उत्खनन, खनन माफिया से सांठगांठ, तस्करी और रंगदारी जैसे गंभीर आरोप हैं, लेकिन सरकार ने इन शिकायतों को दरकिनार किया। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार “सुरक्षा” देती रही और बड़े घोटालों में हुई जांचों को प्रभावित किया गया।

रिटायर्ड आईपीएस बनाम बाबूलाल मरांडी: आरोपों की नई जंग

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्होंने पहले ही मुख्यमंत्री को शराब घोटाले को लेकर लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में CBI जांच में वरिष्ठ IAS अधिकारी विनय चौबे गिरफ्तार हुए, लेकिन अनुराग गुप्ता के ACB प्रमुख रहते
90 दिनों तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई, जिससे आरोपी को जमानत मिल गई।

इसी तरह, कफ सिरप तस्करी के मामले में जब गुजरात ATS ने कार्रवाई की, तो राज्य सरकार और अनुराग गुप्ता द्वारा सीआईडी जांच के नाम पर हस्तक्षेप किए जाने का आरोप भी उन्होंने लगाया।

अनुराग गुप्ता के बहाने मरांडी के निशाने पर कौन?

राजनीतिक हलकों में यह सवाल चर्चा में है कि बाबूलाल मरांडी बार-बार अनुराग गुप्ता को क्यों निशाना बना रहे हैं। क्या यह हमला वास्तव में अनुराग गुप्ता पर है, या फिर उनके बहाने झारखंड सरकार—खासतौर पर हेमंत सोरेन—पर सीधा प्रहार?

मरांडी का आरोप है कि—

1. पूर्व DGP और गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का गठजोड़

उन्होंने दावा किया कि अनुराग गुप्ता का कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा से सीधा संपर्क था।

अवैध वसूली को आसान बनाने के लिए “कोयलांचल शांति समिति” नाम का एक संगठन भी बनाया गया था।

अवैध खनन और शराब माफिया से होने वाली कमाई का 40% हिस्सा अनुराग गुप्ता तक पहुंचता था, ऐसा दावा उन्होंने किया।

2. अवैध नियुक्ति का आरोप

मरांडी ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार ने नियमों को दरकिनार कर ‘गिव-एंड-टेक’ आधार पर अनुराग गुप्ता को DGP बनाया।

केंद्र सरकार द्वारा सेवा विस्तार अस्वीकार करने के बावजूद उन्हें पद पर बनाए रखना असंवैधानिक था।

3. राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आरोप

मरांडी ने यह भी दावा किया कि—

सुजीत सिन्हा गिरोह पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार मंगाने की कोशिश कर रहा था।

इस मामले में अनुराग गुप्ता की भूमिका की जाँच NIA से कराई जानी चाहिए।

 

राजनीतिक संदेश क्या है?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बाबूलाल मरांडी लगातार इस मुद्दे को उठाकर

एक ओर पूर्व DGP के कार्यकाल में हुई कार्रवाइयों पर सवाल खड़ा कर रहे हैं,

दूसरी ओर हेमंत सोरेन सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

अनुराग गुप्ता के बहाने बाबूलाल मरांडी का असली निशाना वर्तमान सरकार और उसकी कार्यशैली बताई जा रही है।

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