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बिहार चुनाव 2025: सीट बंटवारे पर माथापच्ची तेज, कांग्रेस-राजद में बढ़ी खींचतान, एनडीए ने बनाई रणनीति

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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं। सभी दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। एक ओर महागठबंधन (INDIA गठबंधन) के भीतर सीट बंटवारे को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एनडीए (NDA) ने जातीय समीकरण और स्थानीय समीक्षाओं पर आधारित रणनीति तैयार कर ली है।

🔹 महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान

कांग्रेस, राजद और वाम दलों के बीच सीटों के फार्मूले पर सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस का कहना है कि पिछली बार की तुलना में उसे अधिक सीटें दी जानी चाहिए, जबकि राजद तेजस्वी यादव के नेतृत्व में अपने दबदबे को बनाए रखना चाहता है। बताया जा रहा है कि पटना में कांग्रेस की अहम बैठक हुई, जिसमें राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की मुलाकात के एजेंडे पर भी चर्चा हुई।

🔹 एनडीए ने बनाया “3-लेयर फॉर्मूला”

दूसरी ओर भाजपा-जदयू गठबंधन ने सीट बंटवारे को लेकर तीन-स्तरीय फॉर्मूला तैयार किया है। इसमें जातीय समीकरण, क्षेत्रीय प्रभाव और पिछले चुनाव के नतीजों को ध्यान में रखा गया है। एलजेपी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने शुरुआती दौर में 40 सीटों की मांग की थी, लेकिन अब 25 सीटों पर सहमति बनती दिख रही है।

🔹 बयानबाज़ी और राजनीतिक हमले तेज

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि “अगर बिहार में वोट चोरी हुई तो देश में नेपाल जैसी स्थिति बन सकती है।”
वहीं भाजपा ने सीमांचल इलाके में आधार कार्डों की संख्या को लेकर घुसपैठ का मुद्दा उठाया है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बताया है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बिहार में एनडीए फिर से रिकॉर्ड बहुमत से सरकार बनाएगा।

🔹 स्थानीय मुद्दों ने भी पकड़ी रफ्तार

पटना मेट्रो स्टेशन के उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही स्टेशन परिसर में गुटखा के दाग पाए जाने की घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिससे राज्य सरकार की किरकिरी हुई।
वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा बिहार विधानसभा अपने पूरे कार्यकाल में मात्र 146 दिन ही चली, जो अब तक का सबसे कम कार्यकाल रहा।

🔹 चुनावी तारीखों की घोषणा

बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे—पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा चरण 11 नवंबर को, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी।

  • राज्य की सियासत में इन दिनों बयानबाज़ी और गठबंधन समीकरणों का दौर जारी है। अगले कुछ हफ्तों में यह तय होगा कि महागठबंधन अपनी एकजुटता बचा पाता है या एनडीए इसका फायदा उठाकर फिर से सत्ता में वापसी करती है।

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